सिद्धपुर मातृगया तीर्थ पुरोहित ठाकर दिवेश कुमार जयेश कुमार अमे कुल वृक्ष ना पुरोहित छे आ मातृगया नी भूमि छे आहिया लोको दूर-दूर थी आखा वर्ल्ड नी अंदर एकज स्थान छे जय आ कपिल भगवान ए माता नो उद्धार करियो तो अने पोतानी माता ने मुक्ति आपि हति तोह आ मातृगया स्थान छे आने अमे कुलपुरोहित छे कुलवृक्ष नि अंदर अमे जॉइंट छे अमे जोडायला छे तोह दरेक यजमानो अमारो KV I'D - 28327 आमरा परज्या सोनी समाज सोमपुरा सलात अने बीजा अन्य ज्ञांती ना अमारा पासे वंशावली नाम अपेला छे अमारा चोपड़ा नी अंदर ऐमा १०० १५० वरसोना नाम आणि अंदर माली सके छे अने अहिया पर्टिकुलर मातृश्राद्व नारायणबलि ऐना पछि यग्न यग्न आदि कार्यों पण अमे करवये छे शांतिकर्म कोइनी कुंडली ना दोषो होय ऐ पण अमे निवारण करिये छे अने खास जे मुख्या जरूर आ भूमि नी छे ते मातृश्राद्ध नी छे लोको दूर दूर थी मातृश्राद्ध करवा आहिया आवे छे आ भूमि नी अंदर तो जेपन कोई आवे तो आमरो पण संपर्क करि सको छो कुलवृक्ष ना अमे पुरोहित छे तोह पधारो तमारु स्वागत छे।
भारत भूमि नी अंदर मातृगया स्थान सिद्धपुर ना कुलपुरोहित उपाध्या अर्पण कुमार हरिप्रसाद अमारी पासे हलीलुहाना कलिलुहाना पोपटलूहाना जाफराबाद ना वाणिया सूरत ना सोनी आबधि ज्ञांतीऔ ना कुलपुरोहित तरीके सिद्धपुर मातृगया तीर्थ नी अंदर कार्यरथ छे आमेय तोह अमे आ कुलवृक्ष नी अंदर KV I'D - 28335 ऐ मारो कुलपुरोहित कुलवृक्ष नी अंदर जोडायलो रेसगिस्ट्रशन नंबर छे तोह जेथी करी आहिया भारतवर्ष थी आवेला दरेक यात्रियों पोतना मातृऋण माथि मुक्त थाय छे तोह आमे आ सुभ कार्य नी अंदर जोडायला छे.
सिद्धपुर दूर-दूर से लोग आते हैं यहां पर दुनिया का सबसे कठिन काम करने मां का श्राद्ध यह कपिल आश्रम है और यह बिंदु सरोवर है यह पानी नहीं है बेटे बेटियों के आंसू का सागर है कहते हैं सरस्वती नदी यही लुप्त है सरस्वती मां का एक और नाम यह वो स्थल है जो हमें जोड़ता है मां के प्यार दुलार से उसके उपकार से एक अनचुकाय उधर से सिद्धपुर गुजरात माँ के श्राद्ध की एकमात्र पावन भूमि
सिद्धानम कपिलोमुनि इति सिद्धपुर येह नगरी का नाम धर्म शास्त्रों में श्रिष्ठाल भी है सिद्धापूर भी हैं और अभी सिद्धपुर से गुजरात में वो सिद्धपुर मात्रा गया कही जाती है रूद्र महालय का यग्न चला तब उतर में से सारे पण्डितितो को यहाँ बुलाया गया इन परिवारों में से हम सब है यहाँ आकर रूद्रमहालय का यग्न किया फिर राजन सिद्धराज ने हरेक परिवारोंको कुछ दो तीन काम देदिया वो अपनी रोजी चलाय इन गाओ में आज भी पांच हज़ार उतर के उदीच ब्राह्मणों का पुरस्थान है मैं किरण शास्त्री पंडित मंदड़ वाईस प्रेसिडेंट मैं कई वर्षो से येह कार्याक्रम गौतम गोत्र है मेरा और धर्म शास्त्र के आधार से भाविक आता है अपने परिवार का लिस्ट निकलता है परिवार का लिस्ट जो पंडित के पास निकले वो पंडित को उनका कार्य कराने का अधिकार रहता है इस तीर्थ स्थान में २०० पंडित रहते है हर एक जाती के कुंड के परिवार के पंडित होते है और जिस पंडित के ब्याही में जिनका भक्त का खाता निकलेगा यजमान का वो यजमान का काम इनका परिवार कराएगा ये इनका अधिकार क्यों है के सारी ज़िंदगी वो बही उठा कर उठा कर फिरता है और अपने जीवन में कई बार तीर्थ में जाना पड़ता है तोह पहेले बही देखके पंडित निश्चित करके बादमे अर्पण तर्पण समर्पण पिण्ड दान होता है.
नमस्कार सिद्धपुर मातृगया तीर्थ पुरोहित अमितभाई ठाकर आइए सिद्धपुर नी अंदर बाधा होम हवन कथा वार्ता दशा एकादशा श्राद्ध अने मुख्या अधिकार माँ नी मात्रा गया श्राद्ध के जे सम्पति नी पुर्थ्वी पर नी मोटम मोटी पीड़ा केहवामा आवे छे गर्भ नी आहिया अमारा पासे साउथ इंडियन, गुजरात, काठियावाड़, मध्य प्रदेश, अहमदाबाद, बरोदा, बॉम्बे जेवि मोटी मोटी सिटी यो माथि अहिया मातृगया श्राद्ध माटे अहिया पब्लिक तीर्थ पुरोहित तरीके आहिया आवे छे अने अहिया मातृगया श्राद्ध नु मोटम मोटू महत्व छे कोरी पटेल छे ब्राह्मण छे क्षत्रिय छे ठाकोर समाज पटेल समाज आ बाधा ना अमे रजिस्ट्रेशन अहिया तीर्थ पुरोहित कहवाईए छे अने अमरा पासे वंशावली चोपड़ा रजिस्ट्रेशन होय छे ऐ प्रमाणे पीढ़ी दर पीढ़ी अमारा साथै यात्राडु अने यजमानो नो सह परिवार इकट्ठा थाई अने मारो परिवार अहिया बेघो बेसी ने एनो कर्मकांड करिये छे मातृगया स्थान करि आपिये छे अने भारतवर्ष नी अंदर प्रथम श्राद्ध करनारा भगवान परशुराम भगवान जेमनी माता रेणुका नु वध करि मातृऋण माथि ऐ मुक्त थया हता ऐवी पवित्र सिद्धपुर नगरी नी अंदर तीर्थ पुरोहित तरफ थी अमितभाई ठाकर हैवे अमेपन भी अमारो बधों परिवार जे कोई पण भी छे अहिया जेटला पण भी सिद्धपुर मातृगया तीर्थ पुरोहित ना जेटला पण भी ब्राह्मणों छे कुलवृक्ष नी अंदर दरेक परिवार अमारो दरेक परिवार अहिया जोडायलो छे अने दरेक परिवारना साथ सहकर थी यजमानो ने भी केहवामा आवे के रजिस्ट्रेशन ब्राह्मण जोइने कार्यक्रम करावो एटले तीर्थ पुरोहितोने ऐटलू महत्वता नि प्राप्ति थाय अने जे आपदा पीढ़ी दर पीढ़ी जया कार्याक्रम करता आव्या छे ऐवा दरेक तीर्थ पुरोहितो ने अने यजमानोने पण भी पोताने कुल गौर मलिरेह ऐवी अपेक्षा हंगत अमे आ ऐप्प नी अंदर सर्व परिवार जोड़ाई रह्या छे आ संस्था साथै जोड़ाई रह्या छे हु पण भी कुलवृक्ष नि अंदर जोड़ाई रहैलो छू मारो KV I'D - 28696.
नमस्कार हु शास्त्री जयदत्त हरेशभाई मरू नाम छे हु अहिया सिद्धपुर मातृगया क्षेत्र नो तीर्थ पुरोहित छू आना सिवाय पण मोटा मोटा यग्नो वगेरे आमे करवा माटे ऑल ओवर भारत नी अंदर जे तंत्र मार्ग नी अंदर दीक्षित दर्शन विद्या नी अंदर दीक्षित छू ने मारा पिताश्री हता ऐ अखा भारत नी अंदर तंत्र नी अंदर ऐमनु एक नाम हतु हरेशभाई रमणलाल शास्त्री ऐमने घणा घणा मोटा हस्तियों ना घरे जाइने पूजा ने ऐ करावी छे एमा अहिया सिद्धपुर ना धरासभ्या बलवंतसिंह चन्दनसिंघ राजपूत ऐमना कुलगुरु एमना सीवाय घणा पण मोटा जेवा के संजयजोशी भाई भाजप ना एवा S kumar नितिन कासनीवाल एवा असंख्य मोटी हस्तियों ना घरे जाइने मारा पिताजी ऐ कर्मकांड करावेलु छे अने सिद्धपुर मातृदया ऐटले के माता ना गर्भ माथी जन्म लीधो छे महाराज एनो मोक्ष ज्यारे दिकरो अहिया आविने ऐमनु पिण्ड दान करे त्यारे ऐमना ऋण माथि मुक्त थाय छे आणि विशेषता अहिया आगड़ नो इतिहास एवो छे के अहिया आगड़ मैसुर शुरष्टि माता ना गर्भ नी अंदर थी जन्म लेवा वाडो सवथी पहलो माणस होय तोह ऐ कपिल ऐ स्वयम कपिल भगवान छे आमे सिद्धपुर मातृदाय तीर्थ ना कुल पुरोहित छे अहियाना अमे कुलवृक्ष नी अंदर आमे पण जॉइन थइला छे ने राजस्थान वगेरे आखा भारत नी अंदर थी अमारी पासे दरेक ब्राह्मण क्षत्रिय ने वैश्य ऐ त्राण ज्ञांती ना यजमानो अमारी पासे आवता होय छे मारु KV I'D - 28698.
मेरा नाम अल्केश नटवरलाल तुमडिगौर मातृगया ना पंडित अमारी पासे ओछा मा ओछा दोडसो बसों वरस जूनो रेकॉर्ड छे जलाराम बापू ना गुरु गोजर राम बापूना पण हस्ताक्षर छे एक आ शास्त्रीजी ऐ भारत रत्ना बनिगाया एम्नो पण दस्तावेज छे अमारी पासे आखा समाजनो के केटला शास्त्री नी केटला ज्ञांती नो बार एक बरदेई ज्ञांती नो पण गॉड छू द्वारका मा जेनी ध्वजा चढ़े छे अबोटी ब्राह्मण एमनी पण आखि ज्ञांती नो गॉड छू महाराष्टृ मा सम्वेदी ब्राह्मण ना पण आखि ज्ञांती नो गॉड छू राजस्थान मा अवदित शाहस्त्र रोडवाड गोडवाड़ ब्राह्मण पण आखि ज्ञांती नो हु गॉड छू ऐ शिवाय असंख्या नाना नाना कुटुम्भों मोटा मोटा कुटुम्बों बाधा अमारे पासे राजा राजवाड़ा पण अमारा पासे आवे छे कछ मा साकलपुर थी मादिने त्यड़ेश्वर सुधिना वागडना पण अमे गॉड छे यजमान आहिया आविने पोताना कुलगुरु पासे आवि गाम ज्ञांती अने अटक बोले तो ऐना दरेक ना चोपड़ा माथि नाम निकडे ने नाम निकडे पोतानो कुलगुरु केहवाय अने ऐना चौपड़ामा ऐनु कुलवृक्ष पण आहिया मडी आवे छे.
नमस्कार में जय ठाकर सिद्धपुर मातृगया तीर्थ गौर में आपको मातृगया की माहिती दे राह हु सिद्धपुर के अंदर अलग अलग देशों में अलग अलग राज्यों में से लोगो मातृगया तरपण के लिए आते है और यहाँ पर लोग आकर मातृऋण मेसे मुक्त होसकते है भारत के अंदर दूसरा कोई स्थान नइ है जो सिद्धपुर मातृगया जैसा दूसरा हो हमारे यजमानो मेरे खुद के यजमान वापी , वलसाडी , वलसाड , नवसारी , ना जम्मू ब्राह्मणों मेरे यजमान है मेरे नेपाली यजमान भी है कर्णाटक , आंध्र प्रदेश , साउथ कोड़ी पटेलों छे तरपड़ा कोड़ी पटेल छे ब्राह्मणों छे ऐ बधा यजमानोए अहिया मातृश्राद्ध करवा माटे आवे छे चौपड़ामा एमनु रजिस्ट्रेशन करावता होय छे अमे पण बधा आवे कुलवृक्ष मा आमे तीर्थ गौर जोडायला छे आणे हु पण कुलवृक्षमा जोडायो छू मारो KV I'D - 28691









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